कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरमअब सीबीआई की हिरासत में ही क्यों रहना चाहते हैं

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नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम कानूनी दांवपेच में उलझते जा रहे हैं। हालत यह हो गई है कि पहले सीबीआई की हिरासत का विरोध कर रही चिदंबरम की कानूनी टीम अब खुद चाहती है कि उन्हें 2 सितंबर तक एजेंसी की कस्टडी में ही रखा जाए। दरअसल, आज उनकी सीबीआई की हिरासत खत्म हो रही है और शाम तक उन्हें निचली अदालत में पेश किया जाएगा। इससे पहले गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में चिदंबरम की तरफ से की गई पेशकश ने सबको चौंका दिया।

चिदंबरम की तरफ से पलट गईं दलीलें

तीन दिन पुरानी दलीलें सुप्रीम कोर्ट में ठीक उलटी चलने लगीं। चिदंबरम की तरफ से सीबीआई हिरासत जारी रखने और सॉलिसिटर जनरल विरोध करने लगे। गौर करने वाली बात यह है कि आज अगर सीबीआई ने रिमांड आगे न मांगी तो न्यायिक हिरासत में कांग्रेस के दिग्गज नेता चिदंबरम को तिहाड़ जेल भेजा जा सकता है। इससे बचने के लिए ही चिदंबरम की कानूनी टीम लगी हुई थी पर कोई फायदा नहीं हुआ।

21 अगस्त से सीबीआई की कस्टडी में कांग्रेस नेता

आपको बता दें कि चिदंबरम को 21 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था और वह शुक्रवार तक सीबीआई की हिरासत में हैं। उन्हें रिमांड समाप्त होने पर आज संबंधित निचली अदालत में पेश किया जाएगा। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आर. भानुमति और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने कहा कि वह भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई हिरासत में भेजने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर 2 सितंबर को सुनवाई करेगी। इसके फौरन बाद चिदंबरम ने की ओर से यह चौंकाने वाली पेशकश की गई।

हालांकि पूर्व मंत्री के प्रस्ताव पर पीठ ने कोई टिप्पणी नहीं की और कहा कि वह दिल्ली हाई कोर्ट के 20 अगस्त के फैसले को चुनौती देने वाली चिदंबरम की याचिका पर अपना आदेश 5 सितंबर को सुनाएगी। चिदंबरम ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनकी अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज करने के फैसले को चुनौती दी थी। पीठ ने चिदंबरम को गिरफ्तारी से दिए गए अंतरिम संरक्षण को भी 5 सितंबर तक के लिए बढ़ा दिया। चिदंबरम ने अपनी अर्जी में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अग्रिम जमानत मांगी थी।

‘मैं खुद को हिरासत में रखने की पेशकश कर रहा हूं’

चिदंबरम की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल तथा अभिषेक मनु सिंघवी ने पीठ से कहा कि चूंकि रिमांड के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका 2 सितंबर के लिए सूचीबद्ध है इसलिए चिदंबरम तब तक सीबीआई हिरासत में ही रहने की पेशकश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं खुद को 2 सितंबर तक सीबीआई हिरासत में रखने की पेशकश कर रहा हूं। प्रवर्तन निदेशालय को इस पेशकश में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। सीबीआई के मामले में मेरी सीबीआई रिमांड शुक्रवार को समाप्त हो रही है।’

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि रिमांड को केवल निचली अदालत बढ़ा सकती है क्योंकि वहां मामला लंबित है। मेहता ने कहा, ‘अगर शुक्रवार को निचली अदालत में यही पेशकश की जाती है तो हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं होगी।’

आईएनएक्स मीडिया प्रकरण में सीबीआई ने 15 मई 2017 को दर्ज एक प्राथमिकी में आरोप लगाया था कि

आईएनएक्स मीडिया प्रकरण में सीबीआई ने 15 मई 2017 को दर्ज एक प्राथमिकी में आरोप लगाया था कि 2007 में तत्कालीन वित्त मंत्री चिदंबरम के कार्यकाल में आईएनएक्स मीडिया समूह को विदेश से 305 करोड़ का निवेश प्राप्त करने के लिए विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड की मंजूरी देने में अनियमितताएं की गईं। जांच ब्यूरो की प्राथमिकी के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने भी 2017 में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था।

दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय के मामलों में चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। चिदंबरम ने दोनों ही आदेशों को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी लेकिन चूंकि इसके बाद चिदंबरम की गिरफ्तारी हो गई थी, इसलिए कोर्ट ने सीबीआई के मामले में दायर अपील को निरर्थक करार देते हुये उसका निस्तारण कर दिया था।

 

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