कुमाऊँ और गढ़वाल की पारंपरिक कहावत, लोरी, बाल गीतों ‘की ई-बुक हुई लांच,ऐसे करे डाउनलोड

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लॉक डाउन में क्रिएटिव उत्तराखंड के क्रिएटिव सदस्यों ने घर बैठकर पहाड़ों के  विलुप्त गीतों को कंपाइल कर इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का निर्णय लिया है।

कुमाऊँ की मशहूर पारंपरिक लोरियां और बच्चों के गाने ‘घुघूति बासूति’ की दूसरी कड़ी में  एक नई  ई-बुक तैयार की गई है जो गढ़वाली में है

क्रिएटिव उत्तराखंड के सदस्य,कलररिस्ट , हेमंत पन्त रुद्रपुर और दूसरे साथी विनोद खारिया नोएडा में एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं टीम के दूसरे सदस्य भी अलग जगह में रहते हैं

लॉक  डाउन  में घर में रहने के कारण इन लोगों ने इस समय का इस्तेमाल पहाड़ की पारंपरिक कहावत लोरी बाल गीतों को इकट्ठा करने का प्रयास शुरू किया था

कुमाऊं में प्रचलित 32 लोरी कहावत और बाल गीतों को कंपाइल कर घुघूती बासूती शीर्षक से ही बुक तैयार कर सोशल मीडिया में लांच की थी

अब बुधवार को इसने अपना दूसरा संस्करण गढ़वाली में निकाला है जिसमें गढ़वाली की लोरी और बाल  गीतों के करीब 27 पेजों की ई-बुक है।

इनमें प्रमुख लोरी से जा से जा निंदा की बाली,चिन्दा बिंदा रावण झोली, पर्वतीय गीत जै जै घोघा माता फ़ियुनली का फूल आदि शामिल है

इस दौरान क्रिएटिव उत्तराखंड के सदस्यों ने बताया कि उनका मकसद है कि गढ़वाली और कुमाऊं की बोली-भाषा और संस्कृति को लोगो तक पहुचाया जाए.

डाउनलोड लिंक :-

भाग 1 – TinyURL.com/Ebook-Uttarakhand-ChildrenSong Ghughuti Basuti 1 Uttarakhand Children Songs)
भाग 2- Garhwali Balgeet Ghughuti Basuti 2 Uttarakhand Children Songs

 

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