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छत्तीसगढ़ के गांव चिस्दा का शासकीय बालक पूर्व माध्यमिक विद्यालय में बनीं बगिया बच्चों को दे रही सब्जियां

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बिलासपुर।छत्तीसगढ़ के गांव चिस्दा का शासकीय बालक पूर्व माध्यमिक विद्यालय ‘सुपोषण की जंग’ कुछ इस अंदाज में लड़ रहा है। शिक्षक बाबूलाल कर्ष ने गांव के बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए स्कूल में ही ‘वेजिटेबल पार्क’ बना दिया। तीन साल में इसका सुपरिणाम बच्चों की सेहत में झलक रहा है।

विद्यालय में उगाई जा रही सब्जियां

बिलासपुर जिले के मस्तूरी ब्लॉक ग्राम चिस्दा के इस विद्यालय में हर तरह की सब्जियां उगाई जा रही है। हर मौसम में और हर रोज ताजी सब्जियां मुहैया हो जाती हैं। बच्चों के मिड-डे मील में इनका नियमित इस्तेमाल होता है। स्कूल में शिक्षक बाबूलाल कर्ष, साकरावती पटेल और प्रधानाध्यापक छाया कस्र्ण ने इस बगिया को करीने से सहेजा और संवारा है।

बाबूलाल यहां वर्ष 2011 से सेवाएं दे रहे हैं और स्कूल प्रांगण की खाली जगह पर वेजिटेबल पार्क बनाने का विचार उन्हें ही आया। वह कहते हैं, ‘बच्चों को पढ़ाने के साथ उन्हें स्वस्थ रखने का हरसंभव प्रयास करता हूं।’ स्कूल कैंपस में बाउंड्री वॉल नहीं होने के बाद भी शिक्षक और बच्चे वेजिटेबल पार्क के रूप में किचन गार्डन बनाकर सब्जियां उगा रहे हैं। बच्चों को प्रतिदिन शरीरिक व्यायाम के अलावा मिल-डे मील में ताजा सब्जियों के अलावा पोषक भोजन देने पर जोर रहता है।

सीजन के हिसाब से उगाई जाती है सब्जियां

सीजन के हिसाब से कद्दू, लौकी, रखिया, भिंडी, करेला, तुरई, सेम आदि तरकारियां बगिया में मौजूद हैं। स्कूल के आसपास पर्याप्त खाली जगह है, जिसका इस काम में उपयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों को भी बीज देकर हरी सब्जियां उगाने और प्रतिदिन के सेवन में उपयोग के लिए प्रोत्साहित करते हैं। बाबूलाल ने बताया, खास बात यह कि बगिया में रासायनिक दवाओं का बिल्कुल प्रयोग नहीं करते। इसी का परिणाम है कि जिन बच्चों को दो साल पहले शारीरिक कमजोरी थी, वे आज फिट हैं।

शिक्षक का काम सराहनीय

जिला शिक्षा अधिकारी, बिलासपुर आरएन हीराधर कहते हैं, शिक्षक बाबूलाल का कार्य सराहनीय है। किचन गार्डन स्कूली शिक्षा में एक नवाचार है। इससे बच्चों को पुस्तकीय ज्ञान के अलावा भौतिक ज्ञान का विकास होता है। कुपोषण मुक्त भारत में यह एक कारगर कदम है।

छत्तीसगढ़ गौरव रत्न पुरस्कार से नवाजे जाएंगे बाबूलाल

शिक्षक बाबूलाल को सत्र 2018-19 में उत्कृष्ट शिक्षक का अवार्ड भी मिल चुका है। उन्हें छत्तीसगढ़ गौरव रत्न पुरस्कार से भी नवाजे जाने की घोषणा हो चुकी है। शिक्षक के रूप में नवाचार को बढ़ावा देने और कुषोषण के खिलाफ उनके इस प्रयास की शिक्षाजगत के अलावा समाज में खूब सराहना हो रही है।

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